Balmukund gupta biography definition
बालमुकुंद गुप्त की जीवनी, जन्म, मृत्यु, प्रमुख रचनाएँ और साहित्य | Balmukund Gupt Biography Biography, Descent, Death, and Literature in Hindi
बालमुकुंद गुप्त खड़ी बोली और आधुनिक हिंदी साहित्य को स्थापित करने वाले लेखकों में से एक थे. उन्हें भारतेंदु युग और द्विवेदी-युग के बीच की कड़ी के रूप में जाना जाता है. वह एक पत्रकार भी थे और राष्ट्रीय नवजागरण के सक्रिय पत्रकार रह चुक थे एवं साहित्य-सृजन में काफी सक्रिय रहे थे. पत्रकारिता उनके लिए स्वाधीनता संग्राम का हथियार था. वे खड़ी बोली तथा आधुनिक हिन्दी साहित्य को स्थापित करने वाले लेखकों में से एक थे.
बालमुकुंद जी की उर्दू के नामी लेखकों में गणना होती है एवं उन्होंने कुछ हिंदी तथा बाँग्ला पुस्तकों का उर्दू में अनुवाद भी किया किया है. यही कारण है कि उनके लेखन में निर्भीकता पूरी तरह से मौजूद रही थी और साथ ही उसमें व्यंग्य-विनोद का भी कुठ दिखाई पड़ता है. वे शब्दों के अद्भुत पारखी थे एवं अनस्थिरता शब्द की शुद्धता को लेकर उन्होंने महावीर प्रसाद द्विवेदी से लंबी बहस की. इस तरह के अन्य अनेक शब्दों पर उन्होंने बहस चलाई.
जन्म और मृत्यु
बालमुकुंद गुप्त का जन्म 14 नवम्बर सन् ग्राम: गुड़ियानी, जिला रोहतक के हरियाणा में हुआ था. उनके पिता का नाम पूरनमल गोयल था. इनका परिवार बख्शी राम वालों के नाम से प्रसिद्ध था. पन्द्रह वर्ष की आयु में इनका विवाह रेवाड़ी के एक प्रतिष्ठित परिवार में अनार देवी से हुआ. आरंभिक शिक्षा उर्दू में हुई एवं बाद में उन्होंने हिंदी लिपि सीखी. उनके पारिवारिक कारणों से गुप्त जी ने आठवीं कक्षा तक ही विधिवत् शिक्षा प्राप्त की, लेकिन स्वाध्याय के द्वारा उन्होंने काफी ज्ञान अर्जित किया.
उनका 18 सितम्बर में दिल्ली के लाला लक्ष्मी नारायण की धर्मशाला में देहान्त हुआ था. उस समय वह 42 वर्ष की आयु पार करने वाले थे.
जीवन परिचय
बालमुकुंद गुप्त ने विद्यार्थी जीवन से ही उर्दू पत्रों में लेख लिखना शुरू कर दिया था. वे रिफाहे आम’ अखबार और मथुरा के ‘मथुरा समाचार’ उर्दू मासिकाओं में दीनदयाल शर्मा के सहयोगी रहे थे और उसके बाद में चुनार के उर्दू अखबार ‘अखबारे चुनार’ के दो वर्ष संपादक रहे. में लाहौर के उर्दू पत्र ‘कोहेनूर’ का संपादन किया. उन्होंने प्रतापनारायण मिश्र के संपर्क से हिंदी के पुराने साहित्य का अध्ययन किया और उन्हें अपना काव्यगुरू स्वीकार किया.
गुप्त जी ने अपने घर गुड़ियानी में रहकर मुरादाबाद के ‘भारत प्रताप’ उर्दू मासिक का संपादन किया और इस बीच अंग्रेजी का अध्ययन करते रहे. में ‘हिंदी बंगवासी के सहायक संपादक होकर कलकत्ता गए और छह वर्ष तक काम किया और नीति संबंधी मतभेद के कारण इस्तीफा दे दिया. में ‘भारतमित्र’ कलकत्ता के वे संपादक भी रहे थे.
रचनाएँ
वह एक पत्रकार के साथ एक लेखक भी रह चुके थे उनके द्वारा लिखी गई प्रमुख रचनाएँ और साहित्यिक विशेषताएं-
निबंध संग्रह शिवशंभु के चिट्टे, चिट्टे और खत, खेल तमाशा
काव्य संग्रह स्फुट कविताएँ
उर्दू पत्र अकबारे चुनार, कोहेनूर
प्रमुख संपादन अखबार-ए-चुनार, हिंदुस्तान, हिंदी बंगवासी, भारतमित्र आदि.
साहित्यिक विशेषताएं
बालमुकुंद गुप्त के साहित्य की कई विशेषताएं थी जिनके कारण उनका नाम गिने-चुने लिखको में आता था.
उनकी कुछ विशेषताएं-
- ब्रिटेश साम्राज्य का विरोध उनको ब्रिटीश साम्राज्य का भारतीयों पर होने वाले व्यवहार और भारतीयों पर लागु होने वाले कानून भी पसन्द नहीं थे जिसका वह अपने लेख में खुल कर विरोध किया करते थे.
- देश प्रेम की भावना देश प्रेम की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी एवं वह देश प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं समझते थे.
- गाँधीवादी विचारधारा का प्रतिपादन वे गाँधी जी से काफी प्रभावित थे और उनकी शान्तिवाद विचारधारा को मानते थे.
- समाज सुधार पर बल वह अपने लेख में समाज को सुधारने की बात पर बल देकर लिखते थे.
- व्यंग का प्रयोग वह अपने लिखे सभी लेख को व्यंग का प्रयोग करके लिखते थे, जो उनकी उस समय एक पहचान भीं थी.